क्या अमेरिका अपने सबसे वफादार साथी को धोखा दे रहा है?

वाशिंगटन/इरबिल: अमेरिका के ट्रम्प प्रशासन ने मध्य पूर्व में अपने एक सबसे भरोसेमंद सहयोगी को दी जाने वाली सैन्य सहायता समाप्त करने की योजना बनाई है। यह कदम इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र के सुरक्षा बलों ‘पेशमर्गा’ (Peshmerga) के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। पेशमर्गा वही कुर्द सेना है जिसने इस्लामिक स्टेट (IS) के खिलाफ जंग में अमेरिका का कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया था।

मुख्य बातें:

  • समझौते की समाप्ति: पेंटागन और कुर्द क्षेत्रीय सरकार (KRG) के बीच सैन्य सहायता को लेकर हुआ समझौता ज्ञापन (MoU) 30 सितंबर को समाप्त हो रहा है। इसके साथ ही इराक से अमेरिकी सैनिकों की वापसी भी पूरी हो जाएगी।
  • फंडिंग में कटौती: अमेरिकी रक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष 2027 के बजट में पेशमर्गा को दी जाने वाली सभी वित्तीय सहायता (जिसमें वर्ष 2026 में $61 मिलियन दिए गए थे) को बंद करने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिका का तर्क है कि चूंकि IS को हराया जा चुका है, इसलिए अब इन पैसों का उपयोग कहीं और किया जाएगा।
  • ईरान के बढ़ते हमले: यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इराकी कुर्दिस्तान लगातार ईरान और ईरानी समर्थित मिलिशिया के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहा है।

इस फैसले का क्या असर होगा?

  1. सत्ता में शून्य (Power Vacuum): कुर्द अधिकारियों और वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के पीछे हटने से क्षेत्र में सुरक्षा का संकट पैदा होगा, जिससे ईरान, चीन और रूस का प्रभाव बढ़ सकता है।
  2. अमेरिका की विश्वसनीयता पर सवाल: विशेषज्ञों के अनुसार, संकट के समय अपने पुराने और वफादार सहयोगियों को अकेला छोड़ने से दुनिया भर में यह संदेश जाएगा कि अमेरिका पर संकट के समय भरोसा नहीं किया जा सकता।

पेंटागन के सूत्रों का कहना है कि कुर्द क्षेत्र के साथ भविष्य के सुरक्षा संबंधों पर अभी अंतिम समीक्षा चल रही है, लेकिन 30 सितंबर के बाद वर्तमान सौदे को आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है

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